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ईश्वर पूजा से मन प्रसन्न होता है और ह्रदय गरीबों की सेवा करने से ही संतुष्ट होता है कुछ ऐसे ही भावना कुछ संजय वर्मा उर्फ संजू बाबा के दिल में भी उदय हुआ मेरी 4 साल की बिटिया जिसका नाम सृष्टि वर्मा था इंसेफेलाइटिस से काल के गाल में समा गई वैसे तो संजय वर्मा उर्फ संजू बाबा शुरू से ही सामाजिक रहे हैं मेरे पिता श्री भगवान दास वर्मा चौरीचौरा के स्वर्ण व्यवसाई रहे हैं संजय वर्मा उर्फ संजू बाबा शुरू से ही मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा चर्च के निर्माण वह गरीबों की सेवा करते आ रहे हैं यदि कोई विकलांग बेसहारा दिख जाए तो बिना भोजन कराएं एवं दक्षिणा दिए बिना उसे दरवाजे से नहीं लौट आते हैं वर्ष 2014 में मैं अपनी बच्ची सृष्टि वर्मा एवं धर्मपत्नी प्रीति वर्मा के साथ श्री सेलम मल्लिका अर्जुन दर्शन हेतु गए रास्ते में ही सृष्टि वर्मा की तबीयत खराब हो गई इलाज भी असफल हो गया जो मेरे साथ अपने मित्र अपने परिवार के साथ गए थे वह लोग हमें बेसहारों की तरह छोड़ कर उसी दिन वापस चल दिए हैदराबाद में नीलोफर हॉस्पिटल मैं मैं जिसे जानता तक नहीं था पहचानता भी नहीं था उन्होंने एडमिट कराया और 7 दिन मेरी बच्ची सृष्टि वर्मा जिंदगी और मौत से आईसीयू में जूझ ते कॉल से हार गई वहां खून दवा रुपया निशुल्क मिला वहां पर एक डॉक्टर मैडम बहुत अच्छी मिली उनसे मैंने पूछा मैडम क्या दे दूं उन्होंने कहा मुझे कुछ नहीं चाहिए सृष्टि ने हर चीज दिया है मुझे आप अपने घर जाइए और हो सके तो गरीबों के लिए बेसहारों के लिए जो आपसे सेवा बन पाए वह करिए वहीं से मेरी सोच बदल गई जब मैं अपने घर आया तो अपनी मां श्री आरती वर्मा एवं पिता श्री भगवान दास वर्मा बड़े भाई श्री राम आसरे वर्मा बड़े भाई श्री विजय वर्मा बड़े भाई श्री अजय वर्मा से राय विचार किया तू यह लोग तुरंत तैयार होगा और अनाथ आश्रम बनवाने हेतु जमीन भी ले ली गई है प्रत्येक शनिवार को कैंप लगाकर मुंडेरा बाजार चौरी चौरा में कार्यालय सृष्टि धर्मार्थ सेवा संस्थान पर गरीबों के लिए भंडारा वस्त्र एवं रुपयों का वितरण किया जाता है मैंने सोचा कि हम लोग अपना किरदार कुछ अच्छे से निभा सके क्या पता कब कहां किस रूप में इस आत्मा का काल से मुलाकात हो जाए गरीबों की एवं पशु पक्षियों की सेवा करने में ही इस जीवन को समर्पित कर दिया है